WHRO आत्ममंथन करें, कितने दिन हो गए मैने किसी पक्षी के पानी पीने या दाना डालने का सुकार्य नहीं किया। गली मे रात भर भौंक कर परिवार व घर की रखवाली करने वाले कुत्ते के लिए भोजन का विचार मन में क्यो नहीं आया। जिस गाय को माता कहते है, मानते तो है, लेकिन उसके लिए काम पर जाते हुए एक रोटी, या आटे का पेडा लेकर निकले कितने दिन हो गए। निश्चित तौर पर जवाब नकारात्मक ही होंगे। सोचो, इतना निर्दयी कैसे होता जा रहा हूं मै... माता पिता, दादा दादी के दिए संस्कारो पर आधुनिकता और जीवन में आपाधापी की परत कितनी बडी होती जा रही है। मानवता, जन सेवा, प्राणी मात्र की सेवा करने के हमारे संस्कारो को लगने वाला जंग उतरता दिखाई देगा। घर पर जाकर भी पत्नी बच्चो, परिजनो मित्रो के सामने अपनी कमी को स्वीकार करोगे, तो निश्चित तौर पर ये सब आपकी मदद मे जुट जाएंगे। सुकार्यो के लिए, पुण्य कार्यो के लिए। बस इन्ही सब संदेशो को लेकर बनाया गया है-
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दिलाने, गरीब बच्चो की शिक्षा में मदद करने समेत कई कार्य करता है। हमें कोई नकद
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